नई दिल्ली: पिछले एक साल में सोने और चांदी की कीमतों में बहुत तेजी आई है। इनकी कीमतों में 50% से ज्यादा का उछाल देखा गया है। यह सब दुनिया भर में फैली वित्तीय अनिश्चितता के बीच हुआ है। इस उछाल ने एक बार फिर कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश के तौर पर दिखाया है। इसने वित्तीय जगत के दो बड़े नामों ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी और बर्कशायर हैथवे के सीईओ वॉरेन बफे के बीच पुरानी बहस को फिर से छेड़ दिया है। बफे ने पहले सोने को ‘गैर-उत्पादक संपत्ति’ कहकर खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि इसमें कंपनियों या शेयरों जैसी कोई उपयोगिता नहीं है, जो कमाई करते हैं। लेकिन, अब उन्होंने इन कीमती धातुओं का समर्थन किया है। इससे कई लोगों की भौंहें तन गई हैं। कियोसाकी हमेशा से कीमती धातुओं और क्रिप्टोकरेंसी के समर्थक रहे हैं। उन्होंने बफे के इस बदले हुए रुख पर सवाल उठाए हैं। कियोसाकी का मानना है कि बफे का यह बदलाव शेयर और बॉन्ड बाजारों में आने वाली बड़ी गिरावट का संकेत है। यह सब कमजोर डॉलर, धीमी ग्लोबल ग्रोथ के डर और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण हो रहा है। इससे निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं।
वॉरेन बफे ने पहले सोने को हमेशा बेकार बताया था। 1998 में उन्होंने इसे एक ऐसी संपत्ति कहा था जो सिर्फ रखने के काम आती है। जिसका कोई इस्तेमाल नहीं है। उन्होंने एक बार मजाक में कहा था कि सोना जमीन से खोदकर निकाला जाता है। फिर से जमीन में ही दफना दिया जाता है। लेकिन, अब उनका रुख बदल गया है। उन्होंने सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में भूमिका को स्वीकार किया है। इसे आज की अस्थिर आर्थिक स्थितियों की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।कियोसाकी ने दे दी ‘तूफान’ की चेतावनी
बफे के रुख में यह बदलाव बहुत कुछ कहता है। रॉबर्ट कियोसाकी ने इस पर रोशनी डाली है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘भले ही बफे ने सालों तक मेरे जैसे सोने और चांदी के निवेशकों को बेकार कहा। लेकिन, उनका अचानक समर्थन यह बताता है कि शेयर और बॉन्ड बाजार गिरने वाले हैं।’ कियोसाकी का तर्क है कि अगर बफे जैसे दिग्गज भी कीमती धातुओं की ओर मुड़ रहे हैं तो यह इक्विटी और बॉन्ड बाजारों के लिए मुश्किल समय का संकेत हो सकता है।दोनों दिग्ग्जों की राय में रहा है अंतर
रॉबर्ट कियोसाकी लंबे समय से निवेशकों को पारंपरिक संपत्तियों से हटकर निवेश करने की सलाह देते रहे हैं। वह कहते हैं कि लोगों को सोना, चांदी और बिटकॉइन और इथीरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाना चाहिए। उनके विचार में ये निवेश ऊंची महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव या करेंसी की कमजोरी के समय धन की रक्षा करते हैं। आज के समय में वैश्विक महंगाई बढ़ रही है। व्यापार विवाद भी बढ़ रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव भी लगातार बना हुआ है। ऐसे में पर्सनल फाइनेंस के गुरु जोर देकर कहते हैं कि निवेशकों को संभावित वित्तीय मंदी के लिए तैयार रहना चाहिए। वह 1929 की महामंदी जैसी बड़ी मंदी की भी चेतावनी देते हैं। उन्होंने बार-बार कहा है, ‘जब कागजी संपत्ति गिरती है तो कीमती धातुएं और क्रिप्टो सबसे सुरक्षित दांव होते हैं।’ वह अपने इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि निवेशकों को एक ‘अपरिहार्य तूफान’ के लिए तैयार रहना चाहिए।
